नगरीकरण का पर्यावरण पर प्रभाव

 

Dr. Madhulika Agrawal1, Dr. Noopur Agrawal2

1H.O.D Commerce, Govt. Naveen College, Birgaon

 2Asst. Prof. Commerce, Agrasen Mahavidyalaya, Purani Basti, Raipur

*Corresponding Author E-mail:

 

ABSTRACT:

नगरीकरण एक वैष्विक परिर्वतन है। नगरीकरण शहरो का भौतिक परिवर्तन हैं या अन्य शब्दों में जनसंख्या का शहरो में केन्द्रीकरण हैं। शहरी क्षेत्रो कि सीमा और घनत्व में वृद्धि के कारण षहरीकरण होता है। नगरीकरण  का प्रमुख कारण जनसंख्या वृद्धि एंव शहरो में रोजगार की संम्भावना के उद्धेष्य से ग्रामिण क्षेत्रो के लोगो का शहरो मे प्रवास हैं। शहरीकरण के कारण शहरो का विकास ग्रमिण क्षेत्रो की तुलना अधिक तेजी के साथ हो रहा है। भारत में अनियंत्रित शहरीकरण के कारण अनेक पर्यावरण सम्बन्धी समस्याओ का भी जन्म हो रहा है जैसे शहरो में स्थापित उधोगो से होने वाली वायु ध्वनी जल प्रदूषण शहरो में जनसंख्या  घनत्व में वृद्धि के कारण वाहनो की संख्या में और औधौगिक इकाईयों में वृद्धि हुई है। इसके कारण वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा हैं। अतः हमें इस अनियंत्रित शहरीकरण पर रोक लगाने की ओर कदम उठाना चाहिए जिससे पर्यावरण पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव को रोका जा सकता है।

 

KEYWORDS: नगरीकरण का पर्यावरण पर प्रभाव

 

 


प्रस्तावना

शहरीकरण का तात्पर्य शहरो के भौतिक विकास में वृद्धि, षहरो में जनसंख्या का केन्द्रीकरण है। शहरीकरण आज विकास का साधन तो है परन्तु साथ ही साथ यह एक वैष्विक आर्थिक, सामाजिक एंव पर्यावरणीय समस्या उत्पन्न कर रही है। यदि छत्तीसगढ़ राज्य में षहरीकरण की स्थिति देखे तो यहाॅ भी षहरीकरण बहुत तेजी से बढ़ रही है यहांषहरी क्षेत्रो की जनसंख्या सन् 2011 तक 5937237 हो गई ळै।ण्

 

शहरी क्ष्ेात्रो की जनसंख्या कुल जनसंख्या का 23.24 प्रतिषत हो गई है। षहरी जनसंख्या में वृद्धि दर 41.84 प्रतिषत एंव ग्रामिण जनसंख्या में वृद्धि दर केवल 17.78 प्रतिषत है। भारत में यदि शहरो की जनसंख्या में अभी जिस वृद्धि दर से वृद्धि हो रही है तो सन् 2050 तक शहरो की जनसंख्या दुगुनी हो जाएगी यह एक गंभीर समस्या की ओर ईषारा कर रही है। शहरीकरण विकसित देषो की तुलना विकासषील देषांे के लिए ज्यादा घातक सिद्ध होती है। शहरीकरण अनेक समस्याओं को जन्म देती है जैसे आवास, गर्मी, गंदी बस्ती का निमार्ण जल आपुर्ति कि समस्या। धूल, कचरे का निपटारा, वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण भीड़-भाड़ आदि यह सभी समस्या स्वास्थ को प्रभावित करता है।

 

 

षहरीकरण  के प्रमुख कारण

    षहरो में रोजगार की उपलब्धता की संभावना।

    षहरो में उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होना।

    षहरोे में मनोरंजन, खेल-कूद की सुविधा होना।

    षहरो में निवास को प्रतिश्ठा का प्रतीक मानना।

    सभी मुख्य शसकीय कार्यालयो ंका शहरो में होना।

    षहरो में व्यापार ग्रामिण क्षेत्रो की तुलना अधिक सरल होना।

    प्रमुख औधोगिक क्षेत्र ईकाइयो का शहरो में होना।

    

इन सभी कारणों से शहरी जनसंख्या में अनियंत्रित वृद्धि हो रही है जो पर्यावरण पर विपरित प्रभाव डाल रही है।

 

षहरीकरण में जागरूकता बढ़ाना क्यो आवष्यक है।

    वन्यजीवों को हो रहें नुकसान

    प्रदूषण की अधिकता एंव हमारे परिस्थितिकी तंत्र  को हो रहे नुुकसान

    कृषि योग्य भूमि की कमी

    षोर में वृद्धि

    सड़को में भीड़-भाड़

    षहरी क्षेत्रो की तुलना ग्रामिण क्षेत्रो के विकास की गति बहुत कम होना

 

षहरीकरण का पर्यावरण पर प्रभाव

पिछले कुछ दषको से षहरी जनसंख्या में लगातार वृद्धि हो रही है जिसके फलस्वरूप शहरी क्षेत्रो के साथ ग्रामिण क्षेत्रो की भी पर्यावरण दूषित हो रही है। षहरीकरण के कारण औधोगिकीकरण का भी केन्द्रीकरण शहरी क्षेत्रो में हो रहा है। और शहर में अनेक पर्यावरणीय समस्या उत्पन्न हो रही है- यहा के लोगो के लिए पेय जल की समस्या, औधोगिकीकरण एवं वाहनो की अधिकता के कारण वायु का विषैला होना और साथ ही साथ ध्वनि का प्रदूषण, गंदी बस्तियों का  तेजी से निमार्ण, आवास की समस्या के कारण तेजी से वनो खेती योग्य जमीन का तेजी से क्षरण, बढ़ती गंदगी के कारण नदी भूमिगत जलों का भी तेजी से प्रदूषित होना इत्यादि गंभीर पर्यावरणीय समस्या उत्पन्न हो रही है। जिसमें प्रमुख समस्याए निम्नलिखित है-

 

वायु प्रदूषण - षहरीकरण के कारण लगातार शहरों में उधोगो की स्थापना, वाहनो की संख्या में वृद्धि इत्यादि कारणों से शहरो में बहुत तेजी के साथ वायु का प्रदूषण हो रहा है। जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण भारत में बड़े शहरो में से एक दिल्ली में लगातार कुछ वर्षो से वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या के रूप में उभर के सामने आई। यहां की हवा में रहने से अनेक स्वास्थ सम्बन्धी मानवीय रोगो में वृद्धि हो रही है। ठंड के दिनो में यहां  की ।फप् 300  रहती है, जो की प्रदूषित मानक स्तर के उच्चतम बिन्दु पर है

 

 

जल प्रदूषण - शहरो में जनसंख्या के वृद्धि के कारण मानवीय अपषिष्ठो का नदियों में निष्कासन, गंदी नालियों का निर्माण, से जल प्रदूषित हो रही है साथ ही गंदे पानी का जमीन से रिसकर भूमिगत जलो में जाके मिलने से भूमिगत जल भी प्रदूषित हो रही है। भारत देष की राजधानी दिल्ली की प्रमुख नदी यमुना बुरी तरह से प्रदूषित हो चुकी है।

 

ध्वनि प्रदूषण - लगातार बढ़ती जनसंख्या, वाहनो की संख्या, औधोगिक उपक्रमो की स्थापना इत्यादि कारणों से शहरो में बहुत अधिक शोर शराबा बढ़ गई है जो कि मानवीय स्वास्थ पर विपरीत प्रभाव डालती है जिसमें चिड़चिड़ापन, सुनने की समस्या, उच्च रक्तचाप इत्यादि में वृद्धि हो रही है।

 

दिल्ली विष्व के तेजी के साथ शहरीकरण में आगे बढ़ रहे शहरो में से एक है, जिससे साफ है कि शहरीकरण का प्रभाव किस प्रकार उस शहर के पर्यावरण पर विपरीत प्रभाव डाल रही है।

 

निष्कर्ष

शहरीकरण से विकास तो सम्भव है किन्तु इसके अनियंत्रित विकास से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का भी ध्यान देना आवष्यक है। शहरीकरण  के कारण एक विषेष क्षेत्र में जनसंख्या घनत्व बहुत अधिक हो जाता है जो अनेक समस्याए उत्पन्न करती है।

 

इसलिए हमें सरकार को षहरीकरण  को नियंत्रित करने हेतु कदम उठाने होंगे जिसमें मुख्यतः ग्रामिण  क्षेत्रो का प्रवास रोकने के लिए ग्रामिण क्षेत्रो में भी शहरी क्षेत्रो की तरह उचित सुविधा मुहैया कराना, यातायात की सुचारू रूप से व्यवस्था करना, षहरो में कार पोलिंग का बढ़ावा देना, ग्रामिण क्षेत्रो में उचित रोजगार की व्यवस्था करना।

 

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1.        Govt. of India, Census of India 2011

2.        Rai M.S., (2016),”Impact of Urbanization on Environment”, Reserch Trend

3.        Kavita B.D., Smt N.K. Gayathri (2017),” Urbanization in India”, IJSRE

4.        Times of India website

5.        data.g

 

 

 

 

Received on 15.05.2019            Modified on 05.06.2019

Accepted on 17.06.2019            © A&V Publications All right reserved

Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2019; 7(2):392-394.